प्रश्न और उत्तर

कमठ द्वारा शरीर वर्णन

भगवान् सूर्य बोले – वत्स कमठ ! तुम्हारी बुद्धि तो वृद्धों जैसी है | तुम बहुत अच्छा प्रतिपादन कर रहे…

तीर्थ क्या, क्यों और कैसे ?

महतां दर्शनं ब्रह्मज्जायते न हि निष्फलं | द्वेषादज्ञानतो वापि प्रसन्गाद्वा प्रमादतः || अयसः स्पर्शसंस्पर्शो रुक्मत्वायैव जायते | — ब्रह्म पुराण…

“मैं पानी में हूँ, पर गीला नहीं हूँ |”

यस्याज्ञया जगतस्रष्टा विरंचिः पालको हरिः | संहर्ता कालरुद्राख्यो नमस्तस्यै पिनाकिने || —- स्कन्द पुराण अर्थ – जिनकी आज्ञा से ब्रह्मा…