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राघवयादवीयम् के बारे में वायरल पोस्ट का सच

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मंडन 3 – राघवयादवीयम् के बारे में वायरल पोस्ट का सच

यह पोस्ट काफी समय से सोशल मिडिया पर वायरल है कि ऐसा भी एक अद्भुत काव्य ग्रन्थ है, जिसे सीधा और उल्टा, दोनों प्रकार से पढ़ा जा सकता है और दोनों ही प्रकार से पढने पर भी इसका कोई भी शब्द, अन्यार्थक अथवा निरर्थक नहीं होता | सीधा पढने पर, ये श्रीराम जी की स्तुति बन जाती है और उल्टा पढने पर ये, श्रीकृष्ण जी की स्तुति बन जाती है | यह ग्रन्थ कवि वेंकटाध्वरि द्वारा रचित बताया जाता है |

सोशल मिडिया पर फैलने वाली पोस्ट नीचे हैं –
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अति दुर्लभ एक ग्रंथ ऐसा भी है हमारे सनातन धर्म मे
इसे तो सात आश्चर्यों में से पहला आश्चर्य माना जाना चाहिए —
यह है दक्षिण भारत का एक ग्रन्थ
क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो राम कथा के रूप में पढ़ी जाती है और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े तो कृष्ण कथा के रूप में होती है ।
जी हां, कांचीपुरम के 17वीं शदी के कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ “राघवयादवीयम्” ऐसा ही एक अद्भुत ग्रन्थ है।

इस ग्रन्थ को‘अनुलोम-विलोम काव्य’ भी कहा जाता है। पूरे ग्रन्थ में केवल 30 श्लोक हैं। इन श्लोकों को सीधे-सीधेपढ़ते जाएँ, तो रामकथा बनती है औरविपरीत (उल्टा) क्रम में पढ़ने पर कृष्णकथा। इस प्रकार हैं तो केवल 30 श्लोक, लेकिन कृष्णकथा (उल्टे यानी विलोम)के भी 30 श्लोक जोड़ लिए जाएँ तो बनते हैं 60 श्लोक।

पुस्तक के नाम से भी यह प्रदर्शित होता है, राघव (राम) + यादव (कृष्ण) के चरित को बताने वाली गाथा है ~ “राघवयादवीयम।”

उदाहरण के तौर पर पुस्तक का पहला श्लोक हैः

वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥

अर्थातःमैं उन भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम करता हूं, जोजिनके ह्रदय में सीताजी रहती है तथा जिन्होंने अपनी पत्नी सीता के लिए सहयाद्री की पहाड़ियों से होते हुए लंका जाकर रावण का वध किया तथा वनवास पूरा कर अयोध्या वापिस लौटे।

अब इस श्लोक का विलोमम्: इस प्रकार है

सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः ।यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥

अर्थातःमैं रूक्मिणी तथा गोपियों के पूज्य भगवान श्रीकृष्ण केचरणों में प्रणाम करता हूं, जो सदा ही मां लक्ष्मी के साथविराजमान है तथा जिनकी शोभा समस्त जवाहरातों की शोभा हर लेती है।

कृपया अपना थोड़ा सा कीमती वक्त निकाले और उपरोक्त श्लोको को गौर से अवलोकन करें कि यह दुनिया में कहीं भी ऐसा न पाया जाने वाला ग्रंथ है ।
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मंडन 3 – राघवयादवीयम् के बारे में वायरल पोस्ट का सच
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हमने इस स्तोत्र को पूरा देखा, उल्टा-सीधा दोनों तरह से पढ़ा और हमें ये बात सही ज्ञात हुई कि ये सच में अद्भुत ग्रन्थ है और शायद विश्व की एकमात्र रचना हो, जो इस प्रकार लिखी गयी हो, जो दोनों तरफ से अर्थात अंत से शुरू की ओर और शुरू से अंत की ओर पढ़ी जा सकती हो | यदि काव्यरचनाओं की बात हो, तो निश्चित ही, ऐसी अद्भुत रचना को, विश्व के आश्चर्यों में जोड़ा जाना चाहिए, ताकि पता चले कि ऐसा भी कोई ग्रन्थ, किसी भाषा में उपलब्ध है | केवल संस्कृत भाषी अथवा हिंदी भाषी कुछ लोग ही, इस ग्रन्थ के बारे में जान पायें तो ये इस ग्रन्थ के साथ बड़ा अन्याय होगा |

इस ग्रन्थ का सम्पूर्ण पाठ, हिंदी में अनुवाद के साथ, आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं और अन्य लोगों से भी शेयर कर सकते हैं (उपरोक्त पोस्ट में केवल संस्कृत में लिखा हुआ है, जिससे कि हिंदी भाषी, इसे चेक नहीं कर पाते, अतः हम हिंदी अर्थ सहित शेयर करते हैं) ऐसे अद्भुत ग्रन्थ की जानकारी, हर उस व्यक्ति को होनी चाहिए, जो अपने पूर्वजों को मूर्ख समझते हैं कि उन्होंने काल्पनिक आधार पर राम और कृष्ण को मान लिया, जब वो इस रचना को देखेंगे तो पायेंगे कि जिन्हें वो मूर्ख, पिछड़ा हुआ समझते हैं, वो कितने कुशाग्र बुद्धि थे | आप हिंदी में एक लाइन ऐसी नहीं लिख सकते, जो उलटी और सीधी पढ़ी जा सके लेकिन हमारे पूर्वज गजब के तीक्ष्ण बुद्धि थे अतः उनके विवेक पर प्रश्नचिन्ह लगाना और अपने आपको, उनसे श्रेष्ठ समझना बंद होना चाहिए और मानना चाहिए, कि हमारे पूर्वज, कुछ भी करते थे, तो उसके पीछे गहन शोध, अध्ययन और तीक्ष्ण बुद्धि रहती थी |

हिंदी और संस्कृत दोनों में, सम्पूर्ण ग्रन्थ – https://bit.ly/2YBwpmm

पं अशोकशर्मात्मज अभिनन्दन शर्मा

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