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बालसंस्कारशाला – 14

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बालसंस्कारशाला (स्टोरीटेलिंग) – 12
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इस बार की बालसंस्कारशाला में बच्चों को ज्योतिष में से राशियाँ पढ़ाने के लिए, पहले कोण समझाया गया (बच्चे तीसरी कक्षा के थे तो कोण भी सही नहीं जानते थे) | वृत्त में ३६० डिग्री होते हैं, ये समझाना और फिर बताना कि पृथ्वी भी वृत्त में ही घूमती है अतः १ दिन में 360 डिग्री घूमति है | फिर बताना कि क्योंकि २४ घंटे में 360 डिग्री घूमती है अतः ६ घंटे में 90 डिग्री घूमेगी | अतः २ घंटे में ३० डिग्री घूमेगी | फिर बताना कि जैसे रास्ते का मान पता करने के लिए, सड़क किनारे किलोमीटर के पत्थर लगा दिए जाते हैं, वैसे ही आकाश में पृथ्वी कितना घूम गयी, इसके लिए 12 मानक मान लिए गए, जिन्हें राशि कहते हैं | एक राशी ३० डिग्री की मानी गयी | अर्थात जब पृथ्वी, २ घंटे में, ३० डिग्री घूम जाती है तो हम कहते हैं कि एक राशि पार कर ली | इससे ये भी पता चलता है कि एक राशि को पार करने में पृथ्वी को २ घंटे का समय अगता है |

फिर बच्चों को कागज पर वृत्त के 12 भाग करके, हर भाग में एक राशि का नाम लिख कर दिखाया गया | राशियों क्रम से इस प्रकार हैं – मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन | इसके बाद बच्चो को कुंडली काढ कर बताई गयी कि जन्मकुंडली कैसी होती है और क्यों बनाई जाती है ताकि पता कर सकें कि जब बच्चा पैदा होता है तो कौन सा ग्रह, किस कोण पर था और उसे नोट कर लेते हैं | फिर कुंडली में 12 खाने में 12 ग्रह कैसे रखे जाते हैं, ये बताया गया | जो ग्रह जिस राशि में होता है, उसे उसी राशि के खाने में रख लेते हैं (प्रत्येक खाना एक राशी को रेप्रेसेंत करता है) | सभी बच्चो से घर जाकर, अपनी जन्म राशि, यानि चंद्रमा किस राशि में है, ये पता करके आने का होमवर्क दिया गया |

इसके बाद बच्चों को कद्रू और विनीता की कहानी सुनाई गयी कि कैसे सर्प और अरुण और गरुण का जन्म हुआ | कैसे विनीता सूर्श के घोड़े की पूँछ में काले बाल की शर्त लगा कर कद्रू से हारकर उसी की दासी बनी | बाद में, गरुण ने दास की शर्त से मुक्त होने के लिए, सर्पों से याचना की तो बदले में सर्पों ने स्वर्ग से अमृत लाने को कहा | गरुण ने स्वर्ग पर आक्रमण करके, सभी देवताओं को परास्त करके, अमृत कलश लेकर भागे | रास्ते में विष्णु जी का मिलना और गरुण का पराक्रम देखकर उनसे, स्वयं के लिए वाहन मांगना और गरुण का तथास्तु कहना और बदले में सर्पों को खाने का वरदान मांगना |

इंद्र से दोस्ती होना और बताना कि जब मैं कलश सर्पों को दे दूं तो आप लेकर भाग जाना पर पहले मेरी माता को श्राप से मुक्त होने दो | इंद्र का मान जाना | गरुण द्वारा कलश सर्पों को देकर माता को और स्वयं को दास से मुक्ति दिलाना | सर्पों को अमृतपान से पहले स्नान करके आने का सुझाव देना और कलश को कुशासन पर रखना | बच्चो को कुशा के बारे में समझाया | गरुण का लौटना और इंद्रा का कलश ले जाना | सर्पों का कुशा को चाटना और जीभ का दो भागों में विभक्त होना | तब से सर्पों की दो जिह्वा होना |

इसके बाद महाभारत में से, द्रुपद और द्रोणाचार्य की दुश्मनी की कथा और कैसे द्रोणाचार्य ने द्रुपद को पांडवों द्वारा बंदी बनाया और कैसे द्रुपद ने युद्ध में कौरवों को कर्ण समेत हरा दिया और फिर अर्जुन और भीम ने द्रुपद को बंदी बना लिया और फिर द्रोणाचार्य ने द्रुपद का आधा राज्य लेकर, आधा राज्य द्रुपद को ही लौटा दिया |

फिर बच्चो को 12 तक के स्क्वायर याद कराये | उसके बाद 3 राम के नाम, ४ वेदों के नाम, 5 बाण, ६ रसों के नाम याद कराये |

फिर बच्चों को श्लोकों और मन्त्रों का पुनर्भ्यास कराया गया | इस बार का मन्त्र था –
ॐ पयः पृथिव्यां पय ऽ. ओषधीषु पयो दिव्यन्तरिक्षे पयो धाः। पयस्वतीः प्रदिशः सन्तु मह्यम्। –
अर्थात्- हे अग्ने! आप इस पृथ्वी पर समस्त पोषक रसों को स्थापित करें। ओषधियों में जीवनरस को स्थापित करें। द्युलोक में दिव्यरस को स्थापित करें।

और अन्य पुराने श्लोक याद कराये जो केवल अक्की (शैलेश जी के पुत्र) को रेगुलर आने की वजह से याद थे |
१. त्वमेव माता च पिता त्वमेव |
२. कर्पूर गौरं करुणाव्तारम |
3. ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी |
४. या कुंदेंदुतुषारहार धवला |
5. ॐ स्वस्ति न इन्द्रो

इस प्रकार, इस बार की स्टोरी टेलिंग समाप्त हुई |

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