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ब्रह्मा और सरस्वती

खंडन 18 – ब्रह्मा और सरस्वती जी के बारे में वायरल पोस्ट का खंडन

हमें शास्त्र – क्या सच, क्या झूठ ग्रुप में इस बार ब्रह्मा जी और सरस्वती जी के बारे में एक कथा भेजी गयी, जिसमें कि कहा गया है कि ब्रह्मा जी ने अपनी ही पुत्री से विवाह किया और ब्रह्मा और सरस्वती जी ने मिलकर मनु का पैदा किया | वो मनगढ़ंत कथा आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं (1*) पर ये अकेला लिंक नहीं है | इन्टरनेट पर यत्र तत्र सर्वत्र ये कथा इसी रूप में फैली हुई है |

समस्या ये है कि शास्त्रों को लोग पढ़ते नहीं हैं और जो इस प्रकार की पोस्ट लिखते हैं, वो पढ़ते तो हैं किन्तु बिना उसकी गहराई में जाए, अपने नए नए शब्दों को, जो कि उचित नहीं हैं, उस कहानी में ठूंस देते हैं और उन नए शब्दों की वजह से, अर्थ का ही अनर्थ हो जाता है |

जैसे, उपरोक्त कहानी में दो सन्दर्भ ग्रन्थ दे रखे हैं, एक तो सरस्वती पुराण और दूसरा मत्स्य पुराण | अब पहली बात तो यहीं फंस जाती है कि भाई ! ये सरस्वती पुराण कौन सा पुराण है ? हमें अष्टादश पुराण तो सुने हैं, उनमें सरस्वती पुराण का तो कोई नाम ही नहीं है | फिर ये कौन सा नया पुराण आ गया, जिसके आधार पर आप लिखते हैं कि ब्रह्मा जी ने अपनी बेटी से ही विवाह कर लिया !! यदि हम ये समझें कि लेखक ने उप पुराणों के आधार पर ये बात कही है पर सरस्वती नाम से कोई उप पुराण भी नहीं हैं | (उप पुराणों के नाम – 2*)

दूसरा भी जो नाम मस्त्य पुराण का दिया है, उसमें भी न तो किसी श्लोक का कोई सन्दर्भ है, न किसी खंड का कोई सन्दर्भ है | मतलब अगर मैं कल को ये लिख दूं कि स्कन्द पुराण में लिखा है कि सीता जी रावण की बहन थी तो क्या लोगों को मान लेना चाहिए ? क्या इस प्रकार के सन्दर्भ मानने योग्य होते हैं ? जिनका न सिर है न पैर ? यदि कोई सन्दर्भ दिया जाता है तो उसमें श्लोक, खंड, पर्व, अध्याय, कुछ तो लिखेंगे या ऐसे ही मन से लिख देंगे कि फलाने ग्रन्थ में ऐसा ऐसा लिखा है ?

अतः पहली बात तो समझने की ये है कि ऐसी किसी भी कहानी को इन्टरनेट से पढ़कर सत्य मत मानिये, जिसका सन्दर्भ भी उपलब्ध न हो | जिसका सन्दर्भ उपलब्ध हो, उसे भी स्वयं देखिये कि वैसा है या नहीं ! हमने पूर्व के खंडन में दिखाया है कि किस प्रकार से झूठे अध्याय, झूठी श्लोक संख्या तक लिख दी जाती है, इस प्रकार के मनगढ़ंत लेखों में | कोई चेक तो करता नहीं है, अतः सब सत्य मान लेते हैं, जबकि वास्तव में उन ग्रंथो में वैसा कुछ नहीं होता है |

अब इन्होने क्योंकि कोई ग्रन्थ का उचित सन्दर्भ नहीं दिया है अतः अब जो इन्होने आगे कहानी सुनाई है, उसकी ही  लानत मनालत करनी पड़ेगी |

पहली समझने वाली बात तो ये है कि जब हम कहते हैं कि ब्रह्मा पिता है तो इसका अर्थ ये है कि जो भी उनसे पैदा हुआ है, वो उसके पिता हुए | किन्तु ब्रह्मा जी से कोई कैसे पैदा हुआ ? क्या ब्रह्मा जी गर्भधारण करके, संतानों को जन्म देते थे ? नहीं ! ऐसा नहीं होता था | स्कन्द पुराण में लिखा है कि उस समय मानसी सृष्टि होती थी | (3*) मानसी सृष्टि का अर्थ है, मन से | अर्थात ब्रह्मा जी अपने तप के द्वारा उत्पन्न किये गए, तेज से, सृष्टि करते थे | जैसे कि शिव जी ने वीरभद्र को पैदा किया तो क्या आप ये कहते हैं कि वीरभद्र, शिव जी के बेटे थे ? नहीं ! वीरभद्र शिवजी की एक रचना थे, जो उनके क्रोध से उप्तन्न हुआ था | ऐसे ही जो कोई भी ब्रह्मा जी से उत्पन्न हुआ, वो उनकी रचना, कृति थे | हाँ, क्योंकि ब्रह्मा जी को सभी रचनाओं का आदि पुरुष कहा जाता है अतः उन्हें उनकी सभी रचनाओं का पिता बुलाते हैं |

ब्रह्मा जी से नारद जी, जामवंत, सनक, सनंदन, सनातन और सनत कुमार, भृगु, अत्री आदि अनेकों मानस कृतिया हुईं, जिन्हें उनकी मानस सृष्टि अथवा मन से उत्पन्न होने के कारण मानस संतान कहा गया | तो सरस्वती जी भी ब्रह्मा जी की मानस सन्तान थी, न कि उनके पेट से पैदा हुई उनके पुत्री या बेटी | अब क्योंकि सृष्टि में जो कुछ भी था, ब्रह्मा से पहले तो मात्र शिव और विष्णु ही थे और तो कोई था नहीं | सारी सृष्टि भी, ब्रह्मा जी ही बना रहे थे तो जाहिर है, यदि वो किसी से विवाह करेंगे तो उसकी भी रचना उन्हें स्वयं ही करनी पड़ेगी या ये कहें कि यदि उन्हें किसी से विवाह भी करना होगा तो वो भी उनकी ही रचना होगी, जिससे उनका विवाह होगा क्योंकि और कोई तो सृष्टि में है ही नहीं ?

जैसे, मनु और शतरूपा का विवाह हुआ ! मनु कौन ? ब्रह्मा जी का बेटा (अभी इस फर्जी पोस्ट की बात को ही मान लेते हैं, आगे मनु कौन पर भी बात करेंगे) और शतरूपा कौन थी ? ब्रह्मा जी की बेटी ! पर विवाह किस किस में हुआ ? मनु और शतरूपा में ! तो अब ऐसे फर्जी लेखक कहेंगे कि भाई-बहन का ही विवाह हो गया ? यही समझने वाली बात है | यदि मनु को किसी से विवाह करना होगा, तो वो भी ब्रह्मा जी द्वारा रचित रचना ही होगी | उस समय ब्रहमांड में कोई और नहीं था तो किससे विवाह करेगा ? ब्रह्मा जी की ही रचना से न ! तो दोनों भाई बहन मात्र इसलिए नहीं हो जायेंगे कि वो ब्रह्मा जी से उत्पन्न हैं | भाई-बहन को हमारे यहाँ कहा जाता है, सहोदर | जो एक ही उदर से, पेट से,  उत्पन्न हों | यहाँ कोई माता नहीं है, सब रचना हैं, ब्रह्मा जी की | अतः कोई भाई-बहन, बेटा-बेटी का कांसेप्ट नहीं है | सब ब्रह्मा जी से उत्पन्न हैं सो विवाह भी उन्हीं से होगा, उनका भी और उनकी संतानों का भी | अतः ये कहना कि ब्रह्मा जी ने अपनी बेटी से ही विवाह कर लिया भ्रामक है |

दूसरी बात, इस कहानी में लिखा है कि ब्रह्मा जी ने सरस्वती जी से, मनु आदि सन्तान पैदा की जबकी ये भी सही नहीं है | मनु और शतरूपा ब्रह्मा जी की देहज संतान ही थी | शतरूपा का जन्म ब्रह्मा जी के वामांग से हुआ था और अन्य अंग का नाम मनु हुआ | (4* – ऐसे दिये जाते हैं सन्दर्भ, जिन्हें कोई ढूंढ भी सके) इसे ही ‘का’ और ‘या’ का नाम दिया गया था |   मैथुनी सृष्टि अर्थात मनुष्य और स्त्री के समागम से संतान की प्राप्ति का नियम बाद में बना, जो कि दक्ष प्रजापति ने, नारद जी से नाराज होकर बनाया | (उसकी कथा फिर कभी) उसके बाद भी, बहुत समय तक दोनों प्रकार से संतानोत्पत्ति होती रही, तेज से भी और मैथुन से भी जैसे रामायण में खीर से दशरथ की पत्नियों को गर्भ ठहरा, वो भी तेज का ही प्रताप था | जब मनुष्यों में तप के अभाव में तेज कम होता गया तो मात्र मैथुनी सृष्टि ही बची | ऐसा नहीं है कि अब बिना मैथुन के सृष्टि होती ही नहीं, अब भी होती है किन्तु क्योंकि तेज निम्न है, कोई ताप आदि भी नहीं है अतः सृष्टि भी निम्न कोटि की ही होती है, जैसे आप 10 दिन मत नहाइए, आपके बगल में जुएँ पड़ जायेंगी | उनका न कोई माता होती है और न ही पिता | न ही वो आपके किसी स्त्री से संयोग करके, गर्भ धारण से पैदा होती हैं | वो आपके कम तेज की वजह से स्वतः ही, आपके पसीने से पैदा हो जाती हैं | (पसीने से संतान होने के और भी सन्दर्भ आपने शास्त्रों में पढ़े होंगे, मैं आपको कलियुग का प्रक्टिकल बता रहा हूँ)

इस प्रकार ये स्पष्ट होता है कि इस कहानी में तथ्यों को बिना गहराई में जाए, ऊट पटांग तरीके से तोड़ मरोड़ कर, नए शब्दों को घुसा कर और बिना सम्यक चिन्तन और मनन किये, निष्कर्ष निकाले गए हैं और एक भ्रामक कहानी बनायी गयी है | क्यों बनाई गयी है ? ये तो आपको इतने इस खंडन मंडन सीरिज को अब तक पढ़ कर समझ में आ ही गया होगा | इसलिए बनाई गयी क्योंकि उन्हें पता है, कि हिन्दुओं ने स्वयं के किसी भी धर्म/सनातन ग्रन्थ को स्वयं तो पढ़ा नहीं है अतः हम यदि कुछ भी अनर्गल लिख भी देंगे तो कौन सा कोई पकड़ लेगा और 2-3% लोग पकड़ भी लें तो भी 90% से अधिक लोग तो इसे सच मान ही लेंगे | इसलिए वो इस प्रकार की मनगढ़ंत कहानियाँ लिखते हैं |

अतः अब ये आपके ऊपर है कि आप ऐसी कहानियों से अपने शास्त्रों को जानते हैं अथवा स्वयं उनका अध्ययन करते हैं, ये आपके ऊपर है | मैं आपकी जगह होता तो ऐसी किसी भी कहानी को मात्र इन्टरनेट पर कुछ भी लिखे होने की वजह से सच नहीं मान लेता | आप भी मत मानिए… और इसे शेयर कीजिये ताकि, अन्य लोग भी न माने और अपने शास्त्रों के सम्यक स्वरूप को जानें |

पं अशोकशर्मात्मज अभिनन्दन शर्मा

सन्दर्भ

(1*) – https://www.navhindu.com/brahma-ji-ne-apni-beti-se-shaadi-kyon-ki/

(2*) – उप पुराण के नाम – आदि पुराण (सनत्कुमार), नरसिंह पुराण (नृसिंह), नन्दिपुराण (कुमार), शिवधर्म पुराण, आश्चर्य पुराण (दुर्वासा), नारदीय पुराण (नारद), कापिल पुराण (कपिल), मानव पुराण (मनु), औशनस पुराण (उशना), ब्रह्माण्ड पुराण, वारुण पुराण (वरुण), कालिका पुराण (सती), माहेश्वर पुराण (वासिष्ठलैङ्ग), साम्ब पुराण (आदित्य), सौर पुराण (सूर्य), पाराशर पुराण (पराशरोक्त), मारीच पुराण (भागवत), भार्गव पुराण (वासिष्ठ)

(3*) –  स्कन्द पुराण, ब्राह्म खंड, चातुर्मास्य महात्म्य

(4*) – शिव पुराण, 2/16/11

संदीप माहेश्वरी जी के संस्कृत पर वक्तव्य का खंडन

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