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तीर्थ क्या, क्यों और कैसे ?

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महतां दर्शनं ब्रह्मज्जायते न हि निष्फलं | द्वेषादज्ञानतो वापि प्रसन्गाद्वा प्रमादतः || अयसः स्पर्शसंस्पर्शो रुक्मत्वायैव जायते | — ब्रह्म पुराण अर्थ – महापुरुषों का दर्शन निष्फल नहीं होता, भले ही वह द्वेष […]

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संसार सृष्टि

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मस्तकस्थापिनम मृत्युम यदि पश्येदयम जनः । आहारोअपि न रोचते किमुताकार्यकारिता ।। अहो मानुष्यकं जन्म सर्वरत्नसुदुर्लभम । तृणवत क्रियते कैश्चिद योषिन्मूढ़ेर्नराधमै ।। सन्दर्भ – जब अर्जुन पांच तीर्थों में स्नान  करने के लिए गए […]

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उद्देश्य

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इस ब्लॉग का उद्देश्य शास्त्रों के ज्ञान का प्रसार और सर्व साधारण को अपने शास्त्रों और वेदों की नीतियों से अवगत करना है । मैंने अभी कुछ समय पूर्व ही यथासंभव कुछ […]

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