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योग – 1

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अर्जुन बोले – मैं योग के स्वरुप का तात्विक विवेचन सुनना चाहता हूँ | क्योंकि योग को समस्त उत्तम साधनों से भी उत्तम बताकर सब लोग उसकी बड़ी प्रशंसा करते हैं | […]

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जीवन के संदेहों का निवारण

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शोकस्थान शस्त्राणी हर्ष स्थानि शतानि च | दिवसे दिवसे मूढ़माविशन्ति न पंडितम || अर्थात – मूर्ख मनुष्य को ही प्रतिदिन शोक के सहस्त्रों और हर्ष के सैकड़ो स्थान प्राप्त होते हैं, विद्वान […]

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भगवान् है या नहीं ?

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बुद्धिश्च हायते पुंसां नाचैत्तगह समागमात | मध्यस्थेमध्यताम याति श्रेष्ठताम याति चौत्तमे || नारद जी कहते हैं – नन्दभद्र नाम का एक वणिक था | धर्मों के विषय में जो कुछ कहा गया […]

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नारद जी के दुसरे से पंचम प्रश्न का उत्तर

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2. कौन द्विज पचीस वस्तुओं के बने हुए गृह को अच्छी तरह जानता है ? अब पच्चीस वस्तुओं से बने हुए गृह सम्बन्धी द्वितीय प्रश्न का उत्तर सुनिये । पांच महाभूत (पृथ्वी, […]

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दान की परिभाषा और प्रकार

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द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् । चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते ।। सन्दर्भ – राजा धर्म वर्मा दान का तत्व जानने की इच्छा से बहुत वर्षों तक तपस्या की, तब आकाशवाणी ने उनसे […]

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ब्रह्म हत्या

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धर्मो हि मह्ताभेष शरणागतपालनम । शरणागतम च विप्रं च रोगिणं वृद्धमेव च ।। सन्दर्भ – यह उक्ति उस समय की है जब इंद्र बलि के पास समुन्द्र मंथन का प्रस्ताव ले कर […]

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