Saturday, May 30, 2020

दान की परिभाषा और प्रकार

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द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् । चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते ।। सन्दर्भ - राजा धर्म वर्मा दान का तत्व जानने की इच्छा से बहुत वर्षों...

भगवान् शिव की पूजा और फल

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 यह सन्दर्भ तब का है जब कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया किन्तु यह सोच कर दुखी होने लगे कि मैंने शिव भक्त का...

ब्रह्माण्ड और पृथ्वी की परिकल्पना

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स्कन्द जी ने अर्जुन को ब्रह्माण्ड के बारे में ऐसा कहा है कुंतीनंदन ! सृष्टि से पहले यहाँ सब कुछ अव्यक्त एवं प्रकाश शून्य था...

नवग्रहों की स्तिथि एवं विभिन्न पातालों का वर्णन

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नारद जी ने कहा - कुरुश्रेष्ठ ! भूमि से लाख योजन ऊपर सूर्य मंडल है । भगवान् सूर्य के रथ का विस्तार नौ सहस्त्र योजन है...

विभिन्न नरकों का वर्णन

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पाताल के नीचे बहुत अधिक जल है और उसके नीचे नरकों की स्तिथि बताई गयी है । जिनमें पापी जीव गिराए जाते हैं ।...

काल का मान

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अब मैं तुमसे काल का मान बताऊंगा, उसे सुनो - विद्वान लोग पंद्रह निमेष की एक 'काष्ठा' बताते हैं । तीस काष्ठा की एक...

कालभीति का शिवजी से वाद विवाद

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न जायते कुलम यस्य बीजशुद्धि बिना ततः | तस्य खादन पिबतृ वापि साधुः सांदति तत्क्षणात् || कालभीति एक बिल्व वृक्ष के नीचे एक पैर के अंगूठे...

श्राद्ध से पितरों की पूर्ती कैसे होती है ?

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नारद जी कहते हैं - अर्जुन ! इसके बाद राजा करन्धम ने महाकाल से पूछा - भगवन ! मेरे मन में सदा ये संशय...

कलियुग का भविष्य कथन

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राजन ! अट्ठाइसवें कलियुग में जो कुछ होने वाला है, उसे सुनो ! कलियुग के तीन हजार दो सौ नब्बे वर्ष व्यतीत होने पर...

भगवान् है या नहीं ?

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बुद्धिश्च हायते पुंसां नाचैत्तगह समागमात | मध्यस्थेमध्यताम याति श्रेष्ठताम याति चौत्तमे || नारद जी कहते हैं - नन्दभद्र नाम का एक वणिक था | धर्मों के...