Monday, July 6, 2020

पापकर्मों के फल

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धर्मदानकृतं सौख्यमधर्माद दुखःसंभवम् | तस्माधर्मं सुखार्थाय कुर्यात पापं विवर्जयेत || लोकद्वयेऽपि यत्सौख्यं तद्धर्मात्प्रोच्यते यतः | धर्म एव मर्ति कुर्यात सर्वकार्यातसिद्धये || मुहूर्तमपि जीवेद्धि नरः...

कमठ द्वारा शरीर वर्णन

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भगवान् सूर्य बोले - वत्स कमठ ! तुम्हारी बुद्धि तो वृद्धों जैसी है | तुम बहुत अच्छा प्रतिपादन कर रहे हो | अब मैं...

“मैं पानी में हूँ, पर गीला नहीं हूँ |”

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यस्याज्ञया जगतस्रष्टा विरंचिः पालको हरिः | संहर्ता कालरुद्राख्यो नमस्तस्यै पिनाकिने || ---- स्कन्द पुराण अर्थ - जिनकी आज्ञा से ब्रह्मा जी इस जगत की सृष्टि तथा...

जीव कैसे उत्पन्न होता है ?

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कमठ की यह महत्वपूर्ण बात सुनकर अतिथि ब्राह्मण ने मन ही मन उसकी सराहना की और यह प्रश्न उपस्थित किया - 'जीव कैसे उत्पन्न...

आत्मा का भोजन और भोजन के प्रकार

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ये कथा नारद जी के महिसागर संगम तीर्थ के ब्राह्मणों के विषय में हैं, जिन्हें नारद जी, सूर्य जी को बहुत ही उत्तम कुल...

जीवन के संदेहों का निवारण

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शोकस्थान शस्त्राणी हर्ष स्थानि शतानि च | दिवसे दिवसे मूढ़माविशन्ति न पंडितम || अर्थात - मूर्ख मनुष्य को ही प्रतिदिन शोक के सहस्त्रों और हर्ष...

कलियुग का भविष्य कथन

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राजन ! अट्ठाइसवें कलियुग में जो कुछ होने वाला है, उसे सुनो ! कलियुग के तीन हजार दो सौ नब्बे वर्ष व्यतीत होने पर...
कलियुग की भविष्वाणी

कलियुग की प्रवृत्ति का वर्णन

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कलेर्दोषेनिवेश्चैव शृणु चैकं महागुणं | यदल्पेन तु कालेन सिद्धि गच्छति मानवाः || (1) त्रेतायां वार्षिको धर्मो द्वापरे मासिकः स्मृतः | यथा क्लेशं वरन प्राश्स्तहा प्राप्यते कलौ || ...
श्राद्ध

श्राद्ध से पितरों की पूर्ती कैसे होती है ?

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नारद जी कहते हैं - अर्जुन ! इसके बाद राजा करन्धम ने महाकाल से पूछा - भगवन ! मेरे मन में सदा ये संशय...

विभिन्न नरकों का वर्णन

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पाताल के नीचे बहुत अधिक जल है और उसके नीचे नरकों की स्तिथि बताई गयी है । जिनमें पापी जीव गिराए जाते हैं ।...