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वारों के नाम कैसे रखे गए ? सोमवार के बाद मंगलवार ही क्यों ?

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इस बार की बालसंस्कारशाला 16 में बच्चों को बताया कि सोमवार के बाद मंगलवार ही क्यों आता है और शनिवार के बाद रविवार ही क्यों आता है ? शुक्रवार क्यों नहीं आ […]

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बालसंस्कारशाला 15

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इस बार की बालसंस्कारशाला में राशिचक्र के बारे में बताया, कि कैसे 360 डिग्री का एक राशिचक्र होता है और 12 भागों (राशियों) में बाटंने से, एक राशि 30 अंश की हुई […]

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बालसंस्कारशाला – 14

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बालसंस्कारशाला (स्टोरीटेलिंग) – 12————————————— इस बार की बालसंस्कारशाला में बच्चों को ज्योतिष में से राशियाँ पढ़ाने के लिए, पहले कोण समझाया गया (बच्चे तीसरी कक्षा के थे तो कोण भी सही नहीं […]

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नक्षत्रों का फल

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नक्षत्रानुसार प्रभाव – जातक पर नक्षत्र का बहुत प्रभाव पड़ता है | अतः नक्षत्रानुसार जातक पर पड़ने वाला प्रभाव आगे दिया गया है | अश्विनी – विचारशील, अध्ययन, अध्यापन करने वाला, ज्योतिष, […]

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अध्याय 5 – ज्योतिष शास्त्र

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अध्याय – ५ हमने अध्याय 1 के अंत में संक्षेप में लिखा था कि प्रत्येक नक्षत्र को चार चरणों में बांटा गया है | एक नक्षत्र13020| का होता है अतः नक्षत्र के […]

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कथाओ में ज्योतिष !

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श्रीमते विदुषे यूने कुलीनाय यशस्विने, उदाराय सनाथाय कन्या देय वराय वै | – १ एकतः पृथिवी कृत्स्ना सशैलवनकानन, स्वलन्कृतोपाधिहीना सुकन्या चैकतः स्मृता | विक्रीणीते यश्च कन्यामश्वम् वा गां तिलान्यपि || (विस्तार १६५ […]

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अध्याय 4 – ज्योतिष शास्त्र

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जन्म कुंडली बनाने के साधन – जन्म कुंडली निम्नलिखित ३ साधनों से बनाई जा सकती है | 1. विभिन्न प्रकाशकों की Table of Ascendant के द्वारा जन्म के समय पृथ्वी की राशि […]

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अध्याय ३ – ज्योतिष शास्त्र

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अध्याय ३ अब हम थोडा और आगे बढ़ेंगे | जैसे जैसे हम आगे बढ़ते हैं, वैसे वैसे हमारा वास्ता पंचांग और कैलेंडर से पड़ता जायेगा | अतः हमें पंचांग के भी कुछ […]

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अध्याय 2

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अध्याय २ योजनानि शतान्यष्टो भूकर्णों द्विगुणानि तु | तद्वर्गतो दशगुणात्पदे भूपरिधिर्भवते || अर्थात पृथ्वी का व्यास ८०० के दूने १६०० योजन है, इसके वर्ग का १० गुना करके गुणनफल का वर्गमूल निकालने से […]

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अध्याय १

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लोकानामन्तकृत्कालः कालोन्यः कल्नात्मकः | स द्विधा स्थूल सुक्ष्मत्वान्मूर्त श्चामूर्त उच्यते || अर्थात – एक प्रकार का काल संसार का नाश करता है और दूसरे प्रकार का कलानात्मक है अर्थात जाना जा सकता […]

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