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भीम और बर्बरीक का युद्ध

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मलं मूत्रं पुरीषं च श्लेष्मनिष्ठिवितं तथा, गण्डूषमप्सु मुञ्चन्ति ये ते ब्रह्मभिः समाः | अर्थ – जो जल में मल, मूत्र, विष्ठा, कफ, थूक और कुल्ला छोड़ते हैं, वे ब्रह्महत्यारों के सामान है […]

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योग – 1

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अर्जुन बोले – मैं योग के स्वरुप का तात्विक विवेचन सुनना चाहता हूँ | क्योंकि योग को समस्त उत्तम साधनों से भी उत्तम बताकर सब लोग उसकी बड़ी प्रशंसा करते हैं | […]

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पापकर्मों के फल

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धर्मदानकृतं सौख्यमधर्माद दुखःसंभवम् | तस्माधर्मं सुखार्थाय कुर्यात पापं विवर्जयेत || लोकद्वयेऽपि यत्सौख्यं तद्धर्मात्प्रोच्यते यतः | धर्म एव मर्ति कुर्यात सर्वकार्यातसिद्धये || मुहूर्तमपि जीवेद्धि नरः शुक्लेन कर्मणा | न कल्पमति जीवेश लोकद्वयविरोधिना ||                        […]

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कमठ द्वारा शरीर वर्णन

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भगवान् सूर्य बोले – वत्स कमठ ! तुम्हारी बुद्धि तो वृद्धों जैसी है | तुम बहुत अच्छा प्रतिपादन कर रहे हो | अब मैं तुमसे शरीर का लक्षण सुनना चाहता हूँ; उसे […]

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जीव कैसे उत्पन्न होता है ?

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कमठ की यह महत्वपूर्ण बात सुनकर अतिथि ब्राह्मण ने मन ही मन उसकी सराहना की और यह प्रश्न उपस्थित किया – ‘जीव कैसे उत्पन्न होता है ?’ कमठ ने कहा – ब्राह्मण […]

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आत्मा का भोजन और भोजन के प्रकार

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ये कथा नारद जी के महिसागर संगम तीर्थ के ब्राह्मणों के विषय में हैं, जिन्हें नारद जी, सूर्य जी को बहुत ही उत्तम कुल के और श्रेष्ठ ब्राहमण बता रहे हैं | […]

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भगवान् है या नहीं ?

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बुद्धिश्च हायते पुंसां नाचैत्तगह समागमात | मध्यस्थेमध्यताम याति श्रेष्ठताम याति चौत्तमे || नारद जी कहते हैं – नन्दभद्र नाम का एक वणिक था | धर्मों के विषय में जो कुछ कहा गया […]

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कालभीति का शिवजी से वाद विवाद

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न जायते कुलम यस्य बीजशुद्धि बिना ततः | तस्य खादन पिबतृ वापि साधुः सांदति तत्क्षणात् || कालभीति एक बिल्व वृक्ष के नीचे एक पैर के अंगूठे के अग्र भाग पर खड़े हो मंत्रों […]

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काल का मान

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अब मैं तुमसे काल का मान बताऊंगा, उसे सुनो – विद्वान लोग पंद्रह निमेष की एक ‘काष्ठा’ बताते हैं । तीस काष्ठा की एक ‘कला’ गिननी चाहिए । तीस कला का एक […]

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विभिन्न नरकों का वर्णन

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पाताल के नीचे बहुत अधिक जल है और उसके नीचे नरकों की स्तिथि बताई गयी है । जिनमें पापी जीव गिराए जाते हैं । महामते ! उनका वर्णन सुनो – यों तो […]

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