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नास्तिक कौन है ?

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मेरे एक मित्र ने नास्तिकता पर एक पोस्ट की | उसमें नास्तिक होने की एक परिभाषा उन्होंने दी | आजकल वैसे भी सोशल मीडिया पर ये सबसे आम टॉपिक है | मैंने […]

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क्या पांडवों ने युद्ध में अधर्म किया था ?

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जब गांधारी को पता चला की युधिष्ठिर उससे मिलने को आ रहे हैं तो वो रोषपूर्ण आवेग में आ जाती है और युधिष्ठिर को श्राप देने को उद्यत हो जाती है | […]

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कैकयी को वरदान, सही या गलत ?

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राजा दशरथ ने कैकयी के तीनों वचन क्यों माने ? नहीं मानते तो कैकयी क्या कर लेती ? ऐसी क्या मजबूरी थी दशरथ की, जो उसे कैकयी के तीनों वर मानने ही […]

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नारद जी इतने चपल क्यों ?

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अर्जुन एक बार नारद जी से इस प्रकार प्रश्न किया – देवर्षि ! आप सम्पूर्ण प्राणियों के प्रति समान भाव रखने वाले, जितेन्द्रिय तथा राग-द्वेष रहित हैं | तथापि आप में जो […]

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धर्म क्या है ?

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नेत्युवाच ततो वैश्यः सुखं धर्मे प्रतिष्ठितं | पापे दुखं भयं शोको दारिद्रयं क्लेश एव च | यतो धर्मस्ततो मुक्तिः स्वधर्मं किं विनश्यति | (१७०/२६) धर्ममेव परम् मन्ये यथेच्छसि तथा कुरु | ब्रह्मणाश्च […]

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कमठ द्वारा शरीर वर्णन

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भगवान् सूर्य बोले – वत्स कमठ ! तुम्हारी बुद्धि तो वृद्धों जैसी है | तुम बहुत अच्छा प्रतिपादन कर रहे हो | अब मैं तुमसे शरीर का लक्षण सुनना चाहता हूँ; उसे […]

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तीर्थ क्या, क्यों और कैसे ?

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महतां दर्शनं ब्रह्मज्जायते न हि निष्फलं | द्वेषादज्ञानतो वापि प्रसन्गाद्वा प्रमादतः || अयसः स्पर्शसंस्पर्शो रुक्मत्वायैव जायते | — ब्रह्म पुराण अर्थ – महापुरुषों का दर्शन निष्फल नहीं होता, भले ही वह द्वेष […]

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“मैं पानी में हूँ, पर गीला नहीं हूँ |”

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यस्याज्ञया जगतस्रष्टा विरंचिः पालको हरिः | संहर्ता कालरुद्राख्यो नमस्तस्यै पिनाकिने || —- स्कन्द पुराण अर्थ – जिनकी आज्ञा से ब्रह्मा जी इस जगत की सृष्टि तथा विष्णु भगवान् पालन करते हैं और […]

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आत्मा का भोजन और भोजन के प्रकार

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ये कथा नारद जी के महिसागर संगम तीर्थ के ब्राह्मणों के विषय में हैं, जिन्हें नारद जी, सूर्य जी को बहुत ही उत्तम कुल के और श्रेष्ठ ब्राहमण बता रहे हैं | […]

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