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Oct 11

प्रणव क्या है ?

यो विद्याचतुरो वेदान साङ्गोपानिषदो द्विजः | न चेत पुराणं सविद्यावैध्यं स ख्यातिचक्षणः || इतिहास्पुराणास्थां वेदं समुपर्वह्येत | विभेत्वल्प्श्रुताद वेदो मामर्थं प्रहरिष्यति || अर्थ – अङ्ग और उपनिषद के सहित चारो वेदों का अध्ययन करके भी, यदि पुराणों को नहीं जाना गया तो ब्राहमण विचक्षण नहीं हो सकता; क्योंकि इतिहास पुराण के द्वारा ही वेद की …

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