Tag Archive: अर्जुन

Nov 26

योग – 1

yog

अर्जुन बोले – मैं योग के स्वरुप का तात्विक विवेचन सुनना चाहता हूँ | क्योंकि योग को समस्त उत्तम साधनों से भी उत्तम बताकर सब लोग उसकी बड़ी प्रशंसा करते हैं | नारद जी ने कहा – कुरुश्रेष्ठ ! मैं संक्षेप से ही तुम्हें योग का तत्व बतलाता हूँ | इसके सुनने से भी चित्त …

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May 12

ब्रह्माण्ड और पृथ्वी की परिकल्पना

स्कन्द जी ने अर्जुन को ब्रह्माण्ड के बारे में ऐसा कहा है कुंतीनंदन ! सृष्टि से पहले यहाँ सब कुछ अव्यक्त एवं प्रकाश शून्य था । उस अव्याकृत अवस्था में प्रकृति और पुरुष – ये दो अजन्मा (जन्मरहित) एक दूसरे से मिल कर एक हुए, यह हम सुना करते हैं । तत्पश्चात अपने स्वरूपभूत स्वभाव  …

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Dec 16

संसार सृष्टि

मस्तकस्थापिनम मृत्युम यदि पश्येदयम जनः । आहारोअपि न रोचते किमुताकार्यकारिता ।। अहो मानुष्यकं जन्म सर्वरत्नसुदुर्लभम । तृणवत क्रियते कैश्चिद योषिन्मूढ़ेर्नराधमै ।। सन्दर्भ – जब अर्जुन पांच तीर्थों में स्नान  करने के लिए गए और जब उन्होंने पांच ग्राहों को श्राप मुक्त कराया और उन पांचो सुंदर स्त्रियों से ग्राह्स्वरूप में श्रापग्रस्त होने का कारण पुछा तब …

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