टाइम पास

कविता 1 (27 सितम्बर, २०१४)

बहुत जी लिए खुद के लिए, अब थोडा मरना भी सीखो,
कहा किसी ने बहुत किसी से, अब थोडा सुनना भी सीखो,
लिखे गए इतिहास बहुत से, अब खुद इतिहास बनाना सीखो,
घर बीवी बच्चे से ऊपर, देश के लिए कुछ करना सीखो |

मर गए वो लोग और अमर हो गए, तुम जैसो की साँसों में,
बिक गए तुम एक नोट में, किसी भ्रष्ट के हाथो में,
कभी किसी को हाथ पकड़ कर, तुम रस्ता दिखाना सीखो,
न जाने वो कौन मर गए, उनकी याद में रोना सीखो,

बहुत जी लिए खुद के लिए, अब थोडा मरना भी सीखो |

कविता २ (२५ सितम्बर २०१४)

मैं हूँ निशाचर, व्याप्त तम में, लीलता हर भाष्य को मैं,
कपर्दसदृश कालिमा मैं, मैं अह्म्मति, मैं ही मेचक,
मैं तिमिर सा हूँ भयंकर, मैं गरल सा, मैं ही विद्रप,
मैं अघोरी, मैं ही अहंस, मैं दुरित हूँ और मैं ही दुष्कृत,
काल सरिता बह रही है, ग्लौ से लेकर द्यौ परन्तक,
शब्द कलकल आज करते, मैं सुनाऊं तार सप्तक,
अंडकटाह मैं ले के बैठा और काल का कड़छा लिए मैं,
आलोढित करता निरंतर, समस्त सृष्टि को बन के अन्तक,
सुप्तावस्था में तू रहता और सोचे कि जागता हूँ !
चल खडा हो अब चिता से, तेरे रथ का सारथि मैं,
मैं हूँ निशाचर, व्याप्त तम में, लीलता हर भाष्य को मैं |

1. तम – अँधेरा २. कपर्द – शिव की बंधी हुई जटा ३ अहम्मति – अज्ञान, ४. मेचक – रात्रि ५. गरल – विष ६. अहंस, दुरित, दुष्कृत – बुरा 7. ग्लौ – चंद्रमा 8. अंडकटाह – ब्रह्माण्ड ९. आलोढित – हिलाना १०. अन्तक – यमराज

1 comment

  1. Shailesh Shankar

    Dear Sir
    कुंडली देख कर कोई ग्रह किस नक्षत्र में है कैसे जान सकते हैं? कृपया नियम बताऐ।
    धन्यवाद
    शैलेश शंकर
    8989849829

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