चर्चा क्षेत्र


टाइम पास

कविता 1 (27 सितम्बर, २०१४) बहुत जी लिए खुद के लिए, अब थोडा मरना भी सीखो, कहा किसी ने बहुत किसी से, अब थोडा सुनना भी सीखो, लिखे गए इतिहास बहुत से, अब खुद इतिहास बनाना सीखो, घर बीवी बच्चे से ऊपर, देश के लिए कुछ करना सीखो | मर गए वो लोग और अमर …

View page »

2 comments

  1. sudhakar

    अहिंसा परमो धर्म:
    धर्महिंसा तथैव च |

    यह वाक्य गलत है | ….. क्यों और कैसे ?

    1. Shastragyan

      जी, ये वाक्य शास्त्रोक्त नहीं है | ऐसा किसी सनातन शास्त्र में नहीं लिखा हुआ है | अहिंसा परमो धर्मः तक ही लिखा हुआ है, महाभारत में | उसके आगे की लाइन किसी ने जान बूझ कर जोड़ी है, हिंसा फैलाने के उद्देश्य से |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>