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Sep 20

माहेश्वर सूत्र

नृत्यावसाने नटराज राजः ननाद ढक्वाम नवपंच वारम। उद्धर्तु कामाद सनकादि सिद्धै एतत्विमर्शे शिव सूत्र जालम।

अर्थात नृत्य की समाप्ति पर भगवान शिव ने अपने डमरू को विशेष दिशा-नाद में चौदह (नौ+पञ्च वारम) बार चौदह प्रकार की आवाज में बजाया। उससे जो चौदह सूत्र बजते हुए निकले उन्हें ही “शिव सूत्र” या माहेश्वर सूत्र के नाम से जाना जाता है।

१.       अ इ उ ण्। २. ॠ ॡ क्। ३. ए ओ ङ्। ४. ऐ औ च्। ५. ह य व र ट्। ६. ल ण् ७. ञ म ङ ण न म्। ८. झ भ ञ्। ९. घ ढ ध ष्। १०. ज ब ग ड द श्। ११. ख फ छ ठ थ च ट त व्। १२. क प य्। १३. श ष स र्। १४. ह ल्।

 

वास्तव में जब भगवान शिव ने डमरू बजाना बंद किया तो भी कुछ देर तक उसकी आवाज गूंजती रही। वाही अंतिम गूँज महर्षि की समझ में नहीं आया।और उसे व्याकरण शास्त्र की पूर्ती की दृष्टि से लोप की संज्ञा देते हुए (सूत्र हलन्त्यम- देखें अष्टाध्यायी) लुप्त कर दिया गया।

महर्षि पतंजलि ने भी सूत्रों की व्याख्या करते हुए विलुप्त होने की अवस्था को “अग्रे अजा भक्षिता”- अर्थात आगे का सूत्र बकरी खा गई, लिख कर छोड़ दिया है।

प्रत्याहार का अर्थ होता है संक्षिप्त कथन। अष्टाध्यायी के प्रथम अध्याय के प्रथम पाद के 71वें सूत्र ‘आदिरन्त्येन सहेता’ (१-१-७१) सूत्र द्वारा प्रत्याहार बनाने की विधि का पाणिनि ने निर्देश किया है।

आदिरन्त्येन सहेता (१-१-७१): (आदिः) आदि वर्ण (अन्त्येन इता) अन्तिम इत् वर्ण (सह) के साथ मिलकर प्रत्याहार बनाता है जो आदि वर्ण (पहला) एवं इत्सञ्ज्ञक अन्तिम वर्ण के पूर्व आए हुए वर्णों का समष्टि रूप में (collectively) बोध कराता है।

उदाहरण: अच् = प्रथम माहेश्वर सूत्र ‘अइउण्’ के आदि वर्ण ‘अ’ को चतुर्थ सूत्र ‘ऐऔच्’ के अन्तिम वर्ण ‘च्’ से योग कराने पर अच् प्रत्याहार बनता है। यह अच् प्रत्याहार अपने आदि अक्षर ‘अ’ से लेकर इत्संज्ञक च् के पूर्व आने वाले औ पर्यन्त सभी अक्षरों का बोध कराता है। अतः,

अच् = अ इ उ ॠ ॡ ए ऐ ओ औ।

इसी तरह हल् प्रत्याहार की सिद्धि 5वें सूत्र हयवरट् के आदि अक्षर ‘ह’ को अन्तिम १४ वें सूत्र हल् के अन्तिम अक्षर ल् के साथ मिलाने (अनुबन्ध) से होती है। फलतः,

हल् = ह य व र, ल, ञ म ङ ण न, झ भ, घ ढ ध, ज ब ग ड द,ख फ छ ठ थ च ट त, क प, श ष स, ह।

उपर्युक्त सभी 14 सूत्रों में अन्तिम वर्ण की इत् संज्ञा पाणिनि ने की है।

2 comments

  1. Ds bakshi

    इसका महत्व भी बताएं।

  2. Sachin gupta

    It is very useful for students and i need more information about it.
    thank you!

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