Category Archive: स्कन्द पुराण

Jul 06

भीम और बर्बरीक का युद्ध

मलं मूत्रं पुरीषं च श्लेष्मनिष्ठिवितं तथा, गण्डूषमप्सु मुञ्चन्ति ये ते ब्रह्मभिः समाः | अर्थ – जो जल में मल, मूत्र, विष्ठा, कफ, थूक और कुल्ला छोड़ते हैं, वे ब्रह्महत्यारों के सामान है | ये श्लोक उस समय का है, जब पांडव जुए में हार कर, जंगलो में घुमते हुए माँ चंडिका के दर्शन करके उस …

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Nov 26

योग – 1

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अर्जुन बोले – मैं योग के स्वरुप का तात्विक विवेचन सुनना चाहता हूँ | क्योंकि योग को समस्त उत्तम साधनों से भी उत्तम बताकर सब लोग उसकी बड़ी प्रशंसा करते हैं | नारद जी ने कहा – कुरुश्रेष्ठ ! मैं संक्षेप से ही तुम्हें योग का तत्व बतलाता हूँ | इसके सुनने से भी चित्त …

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Sep 28

पापकर्मों के फल

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धर्मदानकृतं सौख्यमधर्माद दुखःसंभवम् | तस्माधर्मं सुखार्थाय कुर्यात पापं विवर्जयेत || लोकद्वयेऽपि यत्सौख्यं तद्धर्मात्प्रोच्यते यतः | धर्म एव मर्ति कुर्यात सर्वकार्यातसिद्धये || मुहूर्तमपि जीवेद्धि नरः शुक्लेन कर्मणा | न कल्पमति जीवेश लोकद्वयविरोधिना ||                        – स्कन्द पुराण धर्मं और दान से सुख प्राप्त होता है और अधर्म से दुःख की उत्पत्ति होती है, अतः सुख के लिए …

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Aug 09

कमठ द्वारा शरीर वर्णन

भगवान् सूर्य बोले – वत्स कमठ ! तुम्हारी बुद्धि तो वृद्धों जैसी है | तुम बहुत अच्छा प्रतिपादन कर रहे हो | अब मैं तुमसे शरीर का लक्षण सुनना चाहता हूँ; उसे बताओ | कमठ ने कहा – विप्रवर ! जैसा यह ब्रह्माण्ड है, वैसा ही यह शरीर भी बताया गया है | पैरों का …

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May 11

जीव कैसे उत्पन्न होता है ?

कमठ की यह महत्वपूर्ण बात सुनकर अतिथि ब्राह्मण ने मन ही मन उसकी सराहना की और यह प्रश्न उपस्थित किया – ‘जीव कैसे उत्पन्न होता है ?’ कमठ ने कहा – ब्राह्मण ! पहले गुरु को, उसके बाद धर्म को नमस्कार करके मैं इस वेदवर्णित प्रश्न का यथाशक्ति समाधान करूँगा ! जीव के जन्म लेने …

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Apr 30

आत्मा का भोजन और भोजन के प्रकार

ये कथा नारद जी के महिसागर संगम तीर्थ के ब्राह्मणों के विषय में हैं, जिन्हें नारद जी, सूर्य जी को बहुत ही उत्तम कुल के और श्रेष्ठ ब्राहमण बता रहे हैं | सूर्य भगवान ब्राहमण का रूप रख कर खुद ही उन ब्राह्मणों के ज्ञान की परीक्षा लेने के लिए चल पड़े | अतिथि (भगवान् …

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Nov 26

भगवान् है या नहीं ?

बुद्धिश्च हायते पुंसां नाचैत्तगह समागमात | मध्यस्थेमध्यताम याति श्रेष्ठताम याति चौत्तमे || नारद जी कहते हैं – नन्दभद्र नाम का एक वणिक था | धर्मों के विषय में जो कुछ कहा गया है, उसमें कोई भी ऐसी बात नहीं थी, जो नन्दभद्र को ज्ञात न हो | किसी के साथ उसका द्वेष नहीं था, न …

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Aug 14

कालभीति का शिवजी से वाद विवाद

न जायते कुलम यस्य बीजशुद्धि बिना ततः | तस्य खादन पिबतृ वापि साधुः सांदति तत्क्षणात् || कालभीति एक बिल्व वृक्ष के नीचे एक पैर के अंगूठे के अग्र भाग पर खड़े हो मंत्रों का जाप करने लगे | जाप  का नियम ग्रहण करने के पश्चात वे सौ वर्षों तक जल कि एक एक बूँद पीकर रहे …

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Aug 14

काल का मान

अब मैं तुमसे काल का मान बताऊंगा, उसे सुनो – विद्वान लोग पंद्रह निमेष की एक ‘काष्ठा’ बताते हैं । तीस काष्ठा की एक ‘कला’ गिननी चाहिए । तीस कला का एक ‘मुहूर्त’ होता है । तीस मुहूर्त के एक ‘दिन-रात’ होते हैं । एक दिन में तीन तीन मुहूर्त वाले पांच काल होते है, …

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Aug 14

विभिन्न नरकों का वर्णन

पाताल के नीचे बहुत अधिक जल है और उसके नीचे नरकों की स्तिथि बताई गयी है । जिनमें पापी जीव गिराए जाते हैं । महामते ! उनका वर्णन सुनो – यों तो नरकों की संख्या पचपन करोड़ है; किन्तु उनमें रौरव से लेकर श्वभोजन तक इक्कीस प्रधान हैं । उनके नाम इस प्रकार हैं – …

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