Category Archive: सुख दुःख

May 15

अहम् ब्रह्मास्मि

क्रोधस्तु प्रथमं शत्रुर्निष्फलो देह्नाशनः, ज्ञानखड्गेन तं छित्वा परमं सुखमाप्नुयात | तृष्णा बहुविधा माया बन्धनी पापकारिणी, छित्वेतां ज्ञानखड्गेन सुखं तिष्ठति मानवः ||                                                — ब्रह्म पुराण अर्थ – मनुष्य का पहला शत्रु है क्रोध | उसका फल तो कुछ भी नहीं है, उलटे वह शरीर का नाश करता है, अतः ज्ञान रुपी खड्ग से उसका नाश …

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May 11

जीव कैसे उत्पन्न होता है ?

कमठ की यह महत्वपूर्ण बात सुनकर अतिथि ब्राह्मण ने मन ही मन उसकी सराहना की और यह प्रश्न उपस्थित किया – ‘जीव कैसे उत्पन्न होता है ?’ कमठ ने कहा – ब्राह्मण ! पहले गुरु को, उसके बाद धर्म को नमस्कार करके मैं इस वेदवर्णित प्रश्न का यथाशक्ति समाधान करूँगा ! जीव के जन्म लेने …

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Jan 17

जीवन के संदेहों का निवारण

शोकस्थान शस्त्राणी हर्ष स्थानि शतानि च | दिवसे दिवसे मूढ़माविशन्ति न पंडितम || अर्थात – मूर्ख मनुष्य को ही प्रतिदिन शोक के सहस्त्रों और हर्ष के सैकड़ो स्थान प्राप्त होते हैं, विद्वान पुरुष को नहीं | नारद जी कहते हैं – तदनन्तर परम बुद्धिमान नंदभद्र बहूदक कुण्ड के तट पर वर्तमान कपिलेश्वर लिंग की पूजा …

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