Shastragyan

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Date registered: November 24, 2014

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  1. अघोरी बाबा की गीता – भाग ५ — December 17, 2017
  2. अघोरी बाबा की गीता – भाग ४ — December 10, 2017
  3. अघोरी बाबा की गीता – ३ — December 10, 2017
  4. अघोरी बाबा की गीता – २ — December 9, 2017
  5. अघोरी बाबा की गीता – भाग 1 — December 6, 2017

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  1. कलियुग की प्रवृत्ति का वर्णन — 6 comments
  2. भगवान शिव और बोडे का नियम — 4 comments
  3. उद्देश्य — 3 comments
  4. अध्याय 4 – ज्योतिष शास्त्र — 3 comments
  5. तीर्थ क्या हैं ? — 3 comments

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Dec 17

अघोरी बाबा की गीता – भाग ५

इधर एक दिन कंपनी से आदेश हुआ कि गुवाहाटी जाओ और जैसा हर बार होता है, अपुन ने बोरिया बिस्तर बाँधा और पहुंच गए गुवाहाटी । गुवाहाटी मुझे बहुत पसंद है क्योंकि एक तो वहां पर बड़ा अच्छा मंदिर है सुक्रेश्वर महादेव मन्दिर और दूसरा मंदिर है उमानंदा मंदिर जो कि ब्रह्मपुत्र नद के बीच …

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Dec 10

अघोरी बाबा की गीता – भाग ४

एक बात बता, मैं इतना समझाता हूँ, उसके बाद भी तेरे प्रश्न ख़त्म नहीं होते ! लाता कहाँ से है इतने सवाल ? – बाबा ने आज डायरेक्टली ही पूछ लिया | आज बाबा ने वो बात पूछ ली, जिसे मैं बिना पूछे शायद किसी को भी नहीं बताता – बाबा, मैंने तो अभी तक …

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Dec 10

अघोरी बाबा की गीता – ३

मेरा गुरु के बारे में टॉपिक चेंज करने का आईडिया सही बैठ गया और बाबा, अब थोड़ा गंभीर हो गए । क्या तुम्हें पता है, शंकराचार्य को उसके गुरु कैसे मिले ? तानसेन को उसके गुरु कैसे मिले ? सूरदास को उसके गुरु कैसे मिले ? – सवालों की झड़ी लगा दी बाबा ने, मुझ …

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Dec 09

अघोरी बाबा की गीता – २

जैसे ही मैंने श और ष में अंतर पूछा, बाबा का चेहरा झुझला गया | ओह ! तो अब क्या व्याकरण भी पढ़ाना पड़ेगा ? ऊपर की तरफ देखते हुए बाबा बोले – इसे गीता पढ़ानी थी ! इसे तो क ख ग भी सिखाना पड़ेगा पहले !!! अब फिर से बातें सर के ऊपर …

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Dec 06

अघोरी बाबा की गीता – भाग 1

रोजाना की तरह मैं अपने आफिस से घर जा रहा था । एक हाथ में स्टीयरिंग, एक हाथ मे मोबाइल और कार में भजन, जैसा रोज होता है । अचानक मेरे अवचेतन मस्तिष्क ने कार में जोरदार ब्रेक लगाये । सामने देखा तो एक बाबा, लंबी जटाओं वाले, भगवा कपड़े पहने, कार के सामने खड़े …

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Jul 06

भीम और बर्बरीक का युद्ध

मलं मूत्रं पुरीषं च श्लेष्मनिष्ठिवितं तथा, गण्डूषमप्सु मुञ्चन्ति ये ते ब्रह्मभिः समाः | अर्थ – जो जल में मल, मूत्र, विष्ठा, कफ, थूक और कुल्ला छोड़ते हैं, वे ब्रह्महत्यारों के सामान है | ये श्लोक उस समय का है, जब पांडव जुए में हार कर, जंगलो में घुमते हुए माँ चंडिका के दर्शन करके उस …

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Apr 24

ब्राहमण की खोज के लिए नारद जी के बारह प्रश्न

मातृकाम को विजानाति कतिधा किद्रशक्षराम । पञ्चपंचाद्भुतम गेहं को विजानाति वा द्विजः ।। बहुरूपाम स्त्रियं कर्तुमेकरुपाम च वेत्ति कः । को वा चित्रकथं बन्धं वेत्ति संसारगोचरः ।। को वार्णव महाग्राहम वेत्ति विद्यापरायणः   । को वाष्टविधं ब्रह्मंयम वेत्ति ब्राह्मणसत्तमः ।। युगानाम च चतुर्णां वा को मूल दिवसान वदेत । चतुर्दशमनूनाम वा मूलवारम च वेत्ति कः ।। कस्मिश्चैव दिने …

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Apr 24

दान की परिभाषा और प्रकार

द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् । चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते ।। सन्दर्भ – राजा धर्म वर्मा दान का तत्व जानने की इच्छा से बहुत वर्षों तक तपस्या की, तब आकाशवाणी ने उनसे उपरोक्त श्लोक कहा । जिसका अर्थ है “दान के दो हेतु, छः अधिष्ठान, छः अंग, दो प्रकार के परिणाम (फल), चार प्रकार, तीन …

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Apr 24

माता-पिता का महत्व

पिता स्वर्गः पिता धर्मः पिता हि  परमं तपः । पितरि प्रितिमापन्ने सर्वाः प्रोणन्ति देवताः ।। यह सन्दर्भ चिरकारी की कथा से लिया गया है जिसमें चिरकारी माता और पिता के महत्त्व को लेकर असमंजस में हैं । उनके पिता ने उन्हें अपनी माता का वध करने का आदेश दिया । क्योंकि वो चिरकारी थे अतः …

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Apr 24

भगवान् शिव की पूजा और फल

 यह सन्दर्भ तब का है जब कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया किन्तु यह सोच कर दुखी होने लगे कि मैंने शिव भक्त का वध किया अतः इस शोक से निकलने के लिए मुझे प्रायश्चित करना चाहिए । भगवान् विष्णु ने तब कार्तिकेय को नाना प्रकार से समझाया किन्तु वे नहीं माने तब भगवान् विष्णु …

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