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बालसंस्कारशाला 15

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इस बार की बालसंस्कारशाला में राशिचक्र के बारे में बताया, कि कैसे 360 डिग्री का एक राशिचक्र होता है और 12 भागों (राशियों) में बाटंने से, एक राशि 30 अंश की हुई | सूर्य इन 12 राशियों में क्रम से जाता है (Geocentric and Heliocentric system भी समझाया गया), एक राशि से जब सूर्य दूसरी राशि में जाता है तो उसे दूसरी राशि की संक्रांति कहा जाता है | जैसे जब सूर्य धनु राशि (241 – 270 अंश) से निकल कर,मकर राशी में प्रवेश करता है तो उसे मकर संक्रांति कहते हैं | इसी प्रकार, साल में 12 संक्रान्ति होती है | हर महीने को सौर मास कहते हैं | इन 12 राशियों के नाम पर ही, हमारे 12 महीने बने और क्योंकि सूर्य मेष राशि में अप्रैल में आता है, इसलिए तब ही हमारा नया साल होता है, न कि 31 जनवरी को | इस प्रकार, बच्चो को संक्रान्ति के बारे में बताकर, फिर बताया कि तारों के समूह को, जिस से कोई आकृति बनती हुई प्रतीत होती है, उस समूह को एक नक्षत्र कहा जाता है और कुल 27 नक्षत्र होत है | अतः राशिचक्र को 27 भागों में बांटा गया, 360/27 = 13 अंश २० पल |

यहाँ बच्चों को बताया कि अंश, पल और विपल क्या होता है ?

जैसे सूर्य एक राशि मे चलता है, मतलब वो 30 डिग्री चला | इसके बाद, यदि उस राशि में एक दिन चला, मतलब वो 1 अंश चला | फिर उस एक अंश के भी 60 टुकड़े कर दिए, तो निकला, 1 पल और उस पल के भी 60 टुकड़े कर दिए तो निकला 60 विपल | इस प्रकार, 1 डिग्री को भी 60 और फिर 60 टुकड़ों में बाँट दिया | जब इतने टुकड़े कर दिए, तो निकला कि सूर्य एक नक्षत्र चलने पर 13 डिग्री, 20 पल चलता है | यदि इसी संख्या को दशमलब में लिखेंगे तो ये हो जायेगी 13 डिग्री, 20/60 अंश = 13.33 अंश (ये बच्चों को नहीं बताया, ये अगली क्लास में बतायेंगे !) बच्चो को 27 नक्षत्रों के नाम भी बताये गए | अगली बार बच्चो को नक्षत्र दिखाए जायेंगे कि उनको कैसे पहचाने, आसमान में |

इस प्रकार बच्चों को बताया कि जन्मराशि वो होती है, जहाँ चंद्रमा होता है, जन्म के समय और जन्मनक्षत्र वो होता है, जहाँ चद्रमा होता है, जन्म के समय | इस प्रकार बच्चो को जन्मराशि और जन्मनक्षत्र देखना बताया गया |

इसके पश्चात, ग्लोब लेकर बच्चो को रेखांश (ग्लोब पर वर्टीकल लाइन्स) और अक्षांश (ग्लोब पर हॉरिजॉन्टल लाइन्स) बताई जिनको अंग्रेजी में, longitude और longitude कहा जाता है | अगली कक्षा में, इन दोनों से कैसे ग्रीनविच टाइम निकाला गया और कैसे समय का प्रत्येक देश में अलग अलग विभाजन किया गया, वो बताया जाएगा |

इसके बाद बच्चो को राजा परीक्षित (अर्जुन के बेटे के बेटे) की मृत्यु और जन्मेजय (परीक्षित का बेटा) द्वारा किये गए नागयज्ञ की कथा सुनाई गयी | इसके बाद बच्चों को बताया कि जीव, जन्म के आधार पर चार प्रकार का होता है – जरायुज (मनुष्य), अंडज (अंडे से जन्म लेने वाले), स्वेदज (पसीने से उत्पन्न) और उद्भिज (पृथ्वी से उत्पन्न) | जैसे विज्ञानिक, विभिन्न जीवों का वर्गीकरण करते हैं, वैसे ही, शास्त्रों में जन्म के आधार पर, ये चार वर्गीकरण किये गए हैं | आयुर्वेद में इसके अलावा, खुरों के आधार पर भी वर्गीकरण है अतः एक ही चीज का, विभिन्न आधारों से वर्गीकरण सम्भव है, जैसे हम निष्कर्ष निकालना चाहें |

बच्चो को महाभारत की कथा नहीं सुनाई क्योंकि कक्षा बहुत लम्बी हो गयी थी |बच्चे सुनना चाहते थे लेकिन कुछ को जाना भी था अतः इस बार महाभारत की कथा नहीं सुनाई गयी | श्लोक भी नहीं कराए गए क्योंकि बच्चे क्लासेस में रेगुलर नहीं हैं, जिससे मैं एक ही श्लोक का पुनर्भ्यास नहीं करा पाता हूँ, अतः इस बार श्लोक नहीं कराए गए | पर इस बार बच्चों से बनेठी घुमवाई गयी और उसका अभ्यास कराया गया ।।

इस बार सत्र में अभिधा शर्मा, पाखी सिंह, अक्की पाण्डेय, शुभम, पुण्डरीक जी की बेटी (नाम नहीं याद) और अर्जुन ने भाग लिया | कृपया इसे शेयर करें ताकि अन्य लोगो तक भी ये इन्फॉर्मेशन पहुचे ।

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