बालसंस्कारशाला 17

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इस बार की बच्चों को पहले बेसिक ध्यान और फिर प्राणायाम कराया गया | तर्कमुद्रा बताई गयी | प्राणायाम क्यों करना चाहिए, ये बताया गया ! उनको बताया गया कि जैसे दीपक में घी खत्म होने पर दीपक बुझ जाता है, ऐसे ही हमारे साँसे पूरी होने पर, हमारा ये जीवन समाप्त हो जाता है | प्रत्येक मनुष्य गिनती की साँसे लेकर पैदा होता है और जैसे ही वो गिनती पूरी हो जाती है, वो मनुष्य मर जाता है | अतः हमें सप्रयास अपनी साँसों (प्राण) को लम्बा करने का प्रयत्न करना चाहिये और जल्दी सांस लेने से बचना चाहिए |

उसके बाद बच्चों को महाभारत में आगे की कहानी सुनाई गयी, जिसमें बताया गया कि जब धृतराष्ट्र पांडवों की ख्याति देख कर परेशान हो गया तो उसने अपने राजनीति में कुशल मंत्री कणिक को बुलवाया | कणिक ने राजा को बताया कि राजा को भले ही अंदर कितना भी क्रोध हो, बाहर से क्रोधशून्य बने रहना चाहिए | मुस्कुरा कर बात करनी चाहिए | गुस्से में किसी का अपमान नहीं करना चाहिए | अपने शत्रुओं को डर दिखा कर या धन का लालच देख कर शांत कर देना चाहिए | राजा को किसी पर अतिविश्वास नहीं करना चाहिए और बच्चो को बताया कि ऐसे ही किसी मित्र पर भी आपको अतिविश्वास नहीं करना चाहिए और कोई भी सीक्रेट बात नहीं बतानी चाहिए, चाहे कितना भी पक्का मित्र क्यों न हो | केवल माता पिता को ही सीक्रेट बातें बतानी चाहिए | राजा जासूसों को भेज कर राज्य की खबर लेता रहे |

कष्ट सहे बिना किसी का कल्याण नहीं होता अतः जो कष्ट के समय में अपनी बुद्धि को स्थिर रखता है, वही कल्याण को प्राप्त होता है | यदि कोई सम्बन्धी संकट में हो तो उसे रामचंद्र जी की या राजा नल की कहानी सुना कर सांत्वना देनी चाहिए कि उनकी तो पत्नी तक कोई चुरा ले गया था, जंगल में रहना पड़ा था, पिता वियोग में मर गए थे, हमारा जो कष्ट है, ये इतना विकट तो नहीं ही है, जितना रामचंद्र जी का था अतः धैर्य रखना चाहिए | कुछ बच्चो को रामायण के बारे में नहीं पता था तो बच्चो को निम्न मजाकिया रामायण बताई गयी –

एक राम एक रामन्ना, एक क्षत्रिय एक बामन्ना |
बाने बाकी सीत चुरी, बाने बाकी लंक जरी |
इत्ती सी बस बातन्ना, तुलसी लिख गये पोथन्ना |

राजा को बिना विचारे कोई कार्य नहीं करना चाहिए | जैसे छुरा पत्थर पर तेज करके, छिपा कर (कवर में) रखा जाता है और समय आने पर, सारे बालों को काट देता है, ऐसे ही राजा को अपने मनोभावों को छुपा कर, साधनों का संग्रह करना चाहिए और उचित समय आने पर अपने शत्रुओं का नाश कर देना चाहिए | अतः आप भी पांडवों के साथ ऐसा ही व्यवहार कीजिये, जिससे आप पर किसी को शक न हो और पांडव भी आगे चलकर आपके लिए परेशानी का कारण न बने |

इधर प्रजा में युधिष्ठिर की तारीफ हो रही थी कि धृतराष्ट्र तो अंधे हैं, वो राजा बनने योग्य नहीं है, भीष्म तो राजा बनेंगे ही नहीं क्योंकि उन्होंने प्रतिज्ञा ले रखी है अतः अब युधिष्ठिर को ही राजा बना देना चाहिए | दुर्योधन का ये पता चलने पर दुखी होना और पिता के पास आकर रोना | पिता को पांडवों को वारणाव्रत भेजने को कहना | धृतराष्ट्र का समझाना कि ये राज्य उन्ही का है, पांडु बड़े थे, फिर भी उन्होंने राज्य मुझे दे दिया लेकिन असल में राज्य तो पांडवों का ही है किन्तु दुर्योधन का कहना कि आपने गलत किया जो राज्य को अपने वश में न किया | अब अगर युधिष्ठिर राजा बन जाएगा तो हम लोग कहाँ जायेंगे ? आगे राजा भी पांडवों के ही पुत्र बनेंगे | अतः आप पांडवों को वारणाव्रत भेज दीजिये, तब तक हम प्रजा को अपने काबू में कर लेंगे, फिर पांडव लौटकर आकर यहाँ चाहे तो रह लें | धृतराष्ट्र का मान जाना और प्रजा में अफवाह उडवाना कि वारणाव्रत बहुत सुंदर जगह है, बहुत से सुंदर पशु पक्षी हैं | प्रजा में भी इस बात की चर्चा होने लगना | पांडवों की भी इच्छा होना कि देखें, कैसा विचित्र है वारणाव्रत | धृतराष्ट्र का ये ताड़कर, तुरंत पांडवों को वारणाव्रत भेजने की आज्ञा देना कि तुम लोगो का मन है तो घूम आओ | पांडवों का आज्ञा को स्वीकार कर लेना |

इधर दुर्योधन द्वारा पुरोचन को बोलना कि तुम मेरे ख़ास सेवक हो, तुम वारणाव्रत जाओ और पांडवों के लिए कागज़ का, लाख का, तेल का महल तैयार करो और जब पांडव उसमें रहने लग जाएँ और विश्वास में आ जाएँ तो उस महल में आग लगा देना | आगे पांडव मरे या नहीं मरे, या कैसे बचे ? ये कहानी अगली क्लास में |

इसके बाद बच्चो को बताया गया कि दो पक्ष होते हैं – शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष | अमावस्या से पूर्णिमा तक शुक्ल पक्ष और पूर्णिमा से अमावस्या तक कृष्ण पक्ष | इन दोनों पक्षों को मिला देने से एक महिना बनता है | २ महीनो की एक ऋतु होती है अतः साल में ६ ऋतु होती हैं | बच्चो को ऋतुओं के नाम याद कराये – शहेशीबग्रीव – शरद, हेमंत, शीत, बसंत, ग्रीष्म, वर्षा | उसके बाद बच्चो को बताया कि 6 महीने का या 3 ऋतुओं का 1 अयन होता है और साल में २ अयन होते हैं | एक उत्तरायण और एक दक्षिणायन | उत्तरायण से गर्मी प्रारम्भ होती है और दक्षिणायन में सर्दी l

इसके बाद बच्चो को लट्ठ फिराना बताया गया 🙂 मतलब बनैठी सिखाई गयी | लड़कियों और लड़कों ने बराबर से लट्ठ चलाया | आप भी देखिये |

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