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राजा दशरथ ने कैकयी के तीनों वचन क्यों माने ? नहीं मानते तो कैकयी क्या कर लेती ? ऐसी क्या मजबूरी थी दशरथ की, जो उसे कैकयी के तीनों वर मानने ही पड़े ? रामायण को कैसे पढ़ें ? शास्त्रों को कैसे पढ़ें ?

अपने शास्त्रों को पढ़ें, हम नहीं पढेंगे तो कौन पढ़ेगा ? कैसे आने वाली पीढ़ी को कुछ सिखा पायेंगे, कुछ देकर जा पायेंगे ? संस्कार कौन डालेगा ? फिर समाज के पतन की चिंता क्यों, यदि खुद कुछ नहीं करना है तो ?

अतः शास्त्रों को उठाइये, किताबो को, ग्रंथो को अपना मित्र बनाइये, अभी भी देर नहीं हुई है | सीखिए और अपने बच्चो को मनोरंजक तरीके से, संस्कार दीजिये | बीजारोपण की तरह ही, संस्कारों का रोपण भी कीजिये | ये जिम्मेदारी है, हमें, अपने कंधो पर उठानी पड़ेगी |

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